विधायकों की मांग पर मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
विनोद शुक्ला, जरवल रोड, बहराइच। लखनऊ को देवीपाटन मंडल (बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर) से जोड़ने वाले घाघरा नदी के संजय सेतु की मरम्मत का कार्य अब आमजन की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद यह निर्णय लिया गया है कि जब तक नदी पर वैकल्पिक पांटून पुल (पीपा पुल) तैयार नहीं हो जाता, तब तक संजय सेतु पर यातायात बंद नहीं किया जाएगा।
विधायकों की मांग पर सीएम का फैसला
ज्ञात हो कि एनएचएआई (NHAI) द्वारा मरम्मत के लिए पुल को 60 दिनों तक पूरी तरह बंद करने की योजना थी। इससे क्षेत्र की बड़ी आबादी को होने वाली असुविधा को देखते हुए गोंडा के जिले के पांच विधायक अजय सिंह, प्रेम नारायन पाण्डेय, विनय द्विवेदी, बावन सिंह, प्रभात वर्मा, व पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। विधायकों ने मांग की थी कि आवागमन बाधित न हो, इसके लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही लोनिवि के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने एनएचएआई को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रयागराज से आएगा पांटून पुल
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के अनुसार, मरम्मत का कार्य अब मार्च के मध्य से शुरू होने की संभावना है।
मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
समय सीमा: पांटून पुल तैयार होने में 15 से 20 मार्च तक का समय लग सकता है।
संसाधन: प्रयागराज माघ मेले में उपयोग किए गए पांटून पुल को यहाँ लाकर घाघरा नदी पर स्थापित किया जाएगा।
लागत: पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग करेगा, जबकि इसका पूरा खर्च एनएचएआई वहन करेगा।
यातायात व्यवस्था: किसे मिलेगी अनुमति?*
वैकल्पिक पांटून पुल बन जाने के बाद यातायात को निम्नलिखित तरीके से संचालित किया जाएगा:
छोटे वाहन व पैदल यात्री: पांटून पुल का उपयोग कर सकेंगे।
भारी वाहन: इनके लिए रूट डायवर्जन की व्यवस्था लागू रहेगी।
मरम्मत अवधि: मुख्य सेतु की मरम्मत के लिए करीब दो महीने का समय निर्धारित किया गया है।
इससे पहले 10 फरवरी से ही पुल बंद करने की तैयारी थी, लेकिन संबंधित जिलों द्वारा एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) न मिलने और जनहित को देखते हुए अब यह नया प्लान तैयार किया गया है।
