आवागमन बंद हुआ तो मंडल के जनपद के लोगों को होगी समस्या
विनोद शुक्ला, जरवलरोड, बहराइच
घाघरा नदी पर स्थित संजय सेतु की हालत बेहद चिंताजनक होती जा रही है। पुल की सतह उखड़ चुकी है, अंदरूनी ढांचा कमजोर हो चुका है और लोहे के हिस्से बाहर नजर आने लगे पुल से बड़े-बड़े होल से पानी दिख रहा है हैं। ऐसे में पुल की भार वहन क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और हर गुजरता वाहन किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रहा है।
पुल की मौजूदा स्थिति खुद खतरे का संकेत दे रही है
शासन-प्रशासन से अनुमति मिले या न मिले, संजय सेतु अब और भार उठाने की स्थिति में नहीं दिख रहा। इसके बावजूद रोज़ाना भारी वाहनों की आवाजाही जारी है, जो कभी भी भयावह दुर्घटना में बदल सकती है।
चिंताजनक स्थिति यह है कि मरम्मत कार्य से जुड़ी इंजीनियरों, मजदूरों और तकनीकी टीम की तैनाती पुल के नीचे की जा चुकी है। मरम्मत सामग्री घाट पर डम्प है, अस्थायी कैंप कार्यालय भी स्थापित है, लेकिन कार्यदायी संस्था उच्च स्तर से अनुमति मिलने का इंतज़ार कर रही है। अनुमति में हो रही देरी खतरे को दिन-ब-दिन बढ़ा रही है।
इस संबंध में अवर अभियंता अनंत मौर्य ने बताया कि संजय सेतु की मरम्मत को लेकर सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। सामग्री, लेबर और तकनीकी संसाधन मौके पर उपलब्ध हैं और अनुमति मिलते ही मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले तत्काल निर्णय लिया जाए, भारी वाहनों पर रोक लगाई जाए और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराया जाए। लोगों का कहना है कि जान जोखिम में डालकर रोज़ाना पुल पार करना अब मजबूरी बन गया है।
