
पंडित जयप्रकाश शुक्ला शास्त्री
विनोद शुक्ला, जरवल रोड, बहराइच। फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर होली पर्व के शुभ मुहूर्त और पारंपरिक विधान को लेकर क्षेत्र के विद्वान ज्योतिषाचार्य जयप्रकाश शुक्ल शास्त्री ने विशेष जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन तथा अगले दिन प्रतिपदा को रंगोत्सव (धुलेंडी) मनाया जाता है, लेकिन वर्ष 2026 में होलिका दहन और रंगोत्सव के बीच चंद्रग्रहण पड़ने से विशेष परिस्थिति बन रही है। इसलिए श्रद्धालुओं को सावधानी के साथ पर्व मनाने की सलाह दी गई है।
शास्त्री जी के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को सायं 5:21 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को सायं 4:34 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा लगते ही भद्रा भी प्रारंभ हो जाएगी, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसलिए भद्रा के मुखकाल को छोड़कर पुच्छकाल में होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। उन्होंने बताया कि होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि अर्धरात्रि के बाद तथा वैकल्पिक रूप से प्रातः लगभग 4:56 बजे के बाद भी किया जा सकता है।
3 मार्च को चंद्रग्रहण सायं 5:59 बजे से शुरू होकर 6:48 बजे तक रहेगा। इसका सूतक काल प्रातः लगभग 6:20 बजे से प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल में शुभ मांगलिक कार्य और भोजन करना निषिद्ध माना गया है। यद्यपि रंग खेलने पर स्पष्ट रोक नहीं है, फिर भी धार्मिक मर्यादा का पालन आवश्यक बताया गया है।
शास्त्री जी ने कहा कि ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान कर रंग खेला जा सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से 4 मार्च को रंगोत्सव मनाना अधिक शुभ और उचित रहेगा।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि 2 मार्च की रात्रि अर्धरात्रि के बाद या प्रातः 4:56 बजे के पश्चात होलिका दहन करें, 3 मार्च को सूतक काल में नियमों का पालन करें और 4 मार्च को हर्षोल्लास, भाईचारे व सौहार्द के साथ रंगोत्सव मनाएं।