
रिपोर्ट – विनोद शुक्ला
करनैलगंज (गोंडा)। ग्राम पंचायत रामगढ़ के अतरौलिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा वाचक श्री रघुनाथ दास शास्त्री त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। कथा के दौरान उन्होंने माखन चोरी लीला, कालिया नाग दमन लीला, गोवर्धन लीला सहित अनेक दिव्य प्रसंगों को विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणाएं हैं। शास्त्री जी ने वर्तमान समय के प्रेम पर चर्चा करते हुए कहा कि आज का प्रेम वास्तव में प्रेम नहीं, बल्कि वासना बनता जा रहा है। सच्चा प्रेम तो गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से किया था, जिसमें किसी प्रकार की स्वार्थ भावना या बाधा नहीं थी। सच्चे प्रेम का अर्थ है कि प्रेमी अपने प्रेम के मार्ग में स्वयं भी बाधा न बने। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान के लिए माखन-मिश्री अर्पित करने का वास्तविक अर्थ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होना चाहिए। व्यक्ति को अपने मन को माखन की तरह कोमल और व्यवहार को मिश्री की तरह मधुर बनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने घर-परिवार में अनावश्यक कटु व्यवहार से बचने की सलाह दी।कथा में गाय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गौ माता समस्त विश्व की माता के समान है और उसकी सेवा से जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है।

कार्यक्रम के आयोजक डॉ. सर्वेश शुक्ला ने जानकारी दी कि 16 अप्रैल को कथा की पूर्णाहुति के उपरांत दोपहर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं से पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है। इस अवसर पर जयप्रकाश शुक्ला, शास्त्री राजेश शुक्ला, लालू तिवारी, राजकुमार तिवारी, शीतला प्रसाद पांडे, अरुण शुक्ला, वर्षा, वैभव शुक्ला, सत्यदेव शुक्ला, राधेश्याम शुक्ल, अशोक, बलराम शुक्ला, देव कुमार शुक्ला सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।