
रिपोर्ट – विनोद शुक्ला
जरवलरोड बहराइच। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल द्वारा गोंडा–बुढ़वल रेलखंड पर आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। बुढ़वल–घाघराघाट (11.77 किमी) के मध्य नव निर्मित 25,000 वोल्ट ए.सी. क्षमता की तीसरी विद्युतकर्षण लाइन का आज रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) पूर्वोत्तर परिमंडल प्रणजीव सक्सेना ने गहन निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण अभय कुमार गुप्ता, मुख्य विद्युत इंजीनियर/निर्माण ओ.पी. सिंह, मुख्य इंजीनियर/टीएमसी संजय यादव, मुख्य विद्युत वितरण इंजीनियर सुरेश कुमार एवं मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर/प्लानिंग निलाभ महेश एसआई वी कमलेश सिंह इंटेलिजेंस गोंडा अरुणेंद्र प्रताप सिंह सहित मंडल व निर्माण संगठन के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
सीआरएस श्री सक्सेना ने बुढ़वल जंक्शन से मोटर ट्रॉली द्वारा निरीक्षण की शुरुआत करते हुए बुढ़वल–घाघराघाट खंड पर बनी तीसरी लाइन का बारीकी से परीक्षण किया। इस दौरान ब्रिज संख्या 393, 392 तथा घाघरा नदी पर बने मेजर ब्रिज संख्या 391 की संरचनात्मक सुरक्षा, ट्रैक एलाइनमेंट, बेयरिंग एवं एक्सपेंशन सिस्टम का गहन निरीक्षण किया गया।

इसके साथ ही समपार संख्या 303 स्पेशल का भी निरीक्षण किया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात गेटमैन से संरक्षा संबंधी सवाल पूछकर उसकी कार्यकुशलता का आकलन किया गया। निरीक्षण के अंतिम चरण में घाघराघाट–बुढ़वल के मध्य तीसरी विद्युत लाइन पर सीआरएस स्पेशल ट्रेन से 120 किमी प्रति घंटे की गति से सफल स्पीड ट्रायल किया गया, जो इस परियोजना की तकनीकी सफलता का महत्वपूर्ण संकेत है। उल्लेखनीय है कि गोंडा–बुढ़वल खंड पर तीसरी रेल लाइन का कार्य चार चरणों में पूरा किया जा रहा है। इसमें गोण्डा कचहरी–बुढ़वल (57.19 किमी) खंड का कार्य पहले ही पूर्ण हो चुका है, जबकि अंतिम चरण में गोंडा जंक्शन–गोंडा कचहरी (4.88 किमी) खंड पर कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना के पूर्ण होने से न केवल रेल यातायात में सुगमता आएगी, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता, गति और क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।